कैंसर का इलाज घर पर करें 100% by Rajiv Dixit

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आज हमारे देश में कैंसर बहुत तेजी से बढ़ रहा है. हर साल करीब 20 लाख लोग इससे मर रहे हैं तथा हर साल नए-नए cases आ रहे हैं. यह एक ऐसी बीमारी बन चुका है जिसके सामने doctors ने भी हार मान ली है.

एक कटुसत्य जो शायद आप नहीं जानते होंगे, कि कैंसर का मरीज अपनी बीमारी से नहीं बल्कि कैंसर के उपचार के लिए अपनाये गए तरीके यानि treatment (chemotherapy) से मर रहा है. doctors कैंसर cells को मरने का नाम लेकर इन तरीकों को अपनातें हैं, लेकिन ये treatment हमारे शरीर कि रोग पर्तिरोधक शक्ति को कमजोर कर देते हैं, इससे मरीज को जो कष्ट होता है वो अलग. ये treatment इतने नुकसानदायक हैं कि इससे मरीज के बाल उड़ जाते हैं, सूजन आ जाती है और चेहरा काला पड़ जाता है.

राजीव दीक्षित जी कैंसर के बारे में कहते हैं कि अगर कोई मरीज कैंसर के treatment यानि chemotherapy, radiotherapy इत्यादि ले लेता है तो उस मरीज का ठीक होना आयुर्वेद के माध्यम से बिलकुल असंभव हो जाता है. राजीव दीक्षित जी कहते है कि उनके पास जो भी मरीज़ आया थर्ड स्टेज तक उन्होंने उसका पूर्ण इलाज किया परन्तु जो भी मरीज़ थेरेपी लेकर आया उन्हें वे नहीं बचा पाए.

क्या खाएं कि कैंसर हो ही ना

इसके बारे में राजीव दीक्षित जी कहते हैं कि अगर हम छिलके वाली दालें, चावल व रेशेदार भोजन खाते हैं तो कैंसर होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. इसके आलावा डालडा (वनस्पति) घी, रिफाइंड तथा डबल रिफाइंड तेल का प्रयोग न करें तथा साथ ही हमें तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी, गुटका, शराब आदि से दूर रहना चहिये, तभी हम कैंसर से मुक्त रह सकते हैं.

कैंसर से बचाव के उपाए

राजीव दीक्षित जी कैंसर के बारे में कहते है कि इस दुनिया में anti-cancerous chemical एक ही है करक्यूमिन, जो हल्दी, पुनर्नवा तथा गाय के मूत्र में मिलता है. राजीव दीक्षित जी कैंसर के बारे में कहते हैं कि कैंसर से बचाव ही उसका उपाय है.

अब बात आती है इन सामग्रियों का सेवन कैसे करें

राजीव दीक्षित जी इसके बारे में बताते हैं कि आप आधा कप देशी गाय का मूत्र लेकर उसे उबाल आने तक उबालें और इसमें आधा चम्मच हल्दी मिलकर सेवन करें, अगर आप इसमें एक चीज पुनर्नवा और मिला लें तो बहुत अच्छा वरना कोई बात नहीं, इसे मिलाने से दवा अधिक कारगर हो जाती है. इसे आप अधिक मात्रा में भी बनाकर बोतल में भी रख सकते हैं, बताई गई सामग्री को उसी मात्रा या अनुपात में बढाकर. इस बोतल को आप फ्रिज में भूलकर भी न रखें तथा धुप में भी न रखें.

इसके साथ-साथ आपको कुछ सावधानियां भी रखनी पड़ेंगीं

राजीव दीक्षित जी इसके बारे में कहते है कि आप जिस गाय का मूत्र लें वो गाय देशी होनी चहिए ना कि जर्सी. अगर गाय काली (देशी) हो तो अतिउत्तम. इसके साथ-साथ ये ध्यान भी रखें कि जिस वक्त आप गाय का मूत्र लें उस वक्त वह गाय गर्भवती नहीं होनी चाहिए, आप गाय कि बछड़ी का मूत्र इस्तेमाल कर सकते हैं. राजीव दीक्षित जी कहते हैं कि आप उसी गाय का मूत्र लें जो खूटे से न बंधी रहे, विचरण करे क्योंकि जो गाय विचरण करती है उस गाय के मूत्र में अधिक क्षमता होती है रोग ठीक करने की. एक और जरुरी बात आप गाय के शरीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र ही प्रयोग में लें. गौमूत्र अर्क प्रयोग में ना लें यह फायदेमंद नहीं है, इससे बिलकुल भी परिणाम नहीं निकलेगा. एक और बात यह दवा केवल तभी काम करेगी जब तक मरीज ने chemotherapy आदि नहीं लिया हो. अगर इलाज शुरू हो चुका हो तो यह दवा काम नहीं करेगी.

अब आप सोचेंगें कि यह समस्या सबसे ज्यादा महिलाओं में पाई जाती है और महिलाएं तो सिगरेट, बीड़ी इत्यादि बहुत कम सेवन करती हैं तो इसका क्या उपाय है?

इसके बारे में राजीव दीक्षित जी कहते है कि माताएं तथा बहनें अपने शरीर में हो रही unwanted growth यानि जो आप नहीं चाहती जैसे गांठ, रिसोली हो तो आप तुरंत सचेत हो जाएँ हालाँकि यह जरुरी नहीं है कि हर गांठ तथा रिसोली कैंसर हो, मात्र 2-3% ही ऐसी गांठ तथा रिसोली होती हैं जो बाद में कैंसर में बदल जाती हैं. मगर सचेत होना जरुरी है.

इसके लिए जरुरी है आपको इन गांठों तथा रिसोलियों को जल्दी से जल्दी गलाना या घोलना होगा तो इसके बारे में राजीव दीक्षित जी कहते है कि इसकी दुनिया में सबसे अच्छी दवा है, चुना वही चुना जो पान में लगाकर खाते हैं. आप इसका सेवन सीधे-सीधे ना करें इससे जीभ कट जायेगी. इसे आप पानी में घोलकर, दाल, सब्जी, छाछ तथा दही में भी मिलाकर खा सकते हैं. कितना खाएं, आप एक कनक के दाने के बराबर इसे लेकर इसका सेवन कर सकते हैं.

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